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11वीं क्लास का प्यार | 11th CLASS KA PYAR | REAL LOVE STORY

11वीं क्लास का प्यार | 11th CLASS KA PYAR

दोस्तों कैसे हो आप सब? आशा करता हूँ ठीक ही होंगे... आपको कभी ना कभी किसी न किसी लड़की से प्यार जरुर हुआ होगा अगर हुआ है तो निचे comment box में जरुर बताना | इस कहानी में मैं आपको अपनी 11th क्लास की Love story सुनाने जा रहा हूँ | आशा करता हूँ कि ये story आपको पसंद आएगी तो चलिये आपको बोर ना करते हुए कहानी को शुरू करते हैं ...

11वीं क्लास का पहला दिन 

ये वाक्या तब का है जब मैं 11वीं में था, 10वीं के एग्जाम के बाद हमारी छुटियाँ  चल रही थीं छुट्टी खत्म होने के बाद क्लास में मेरा पहला दिन था मैं क्लास में अक्सर फर्स्ट बेंच में बैठा करता था हमारे क्लास में बहुत से नये लोगो ने एडमिशन लिया था जिसमें बहुत सी लडकियाँ भी थी | उनमें से एक लड़की थी रिया | कद छोटा था छोटी – छोटी आंखें, लम्बे बाल, गोरा रंग और खूबसूरती में तो किसी अप्सरा से कम नहीं थी | क्लास में पहला दिन होने के वजह से शायद रिया थोड़ी डरी सहमी सी लग रही थी | मैं बस उसे ही देखे जा रहा था मेरी नज़र उसके चेहरे से हट ही नहीं रही थी | पहली बार किसी लड़की को मैं इतने प्यार से देख रहा था |

मुझे उस से प्यार होते जा रहा था

रिया मैथ्स से थी और मैं बायोलाजी से | क्लास में रिया ज्यादातर शांत ही रहती थी | ना ज्यादा किसी से बात करती थी ना किसी से मजाक करती थी | मैं बस क्लास में उसको ही देखा करता था इस से पहले मेरे दिल को कोई लडकी इतनी अच्छी नहीं लगी थी शायद मुझे उस से प्यार होते जा रहा था | मैं उसे देखकर बस यही सोचता था कि कोई लडकी 11वीं में इतनी मासूम कैसे हो सकती है? काश मैं उस से बात कर पाता...! उसका ध्यान सारा वक़्त बस पढाई में ही लगा रहता था और मेरा बस उसे देखने में |

रास्ते में उसका इंतजार करना

रिया हमेशा अपनी स्कूटी में ही स्कूल आया करती थी मैं हमेशा उस से पहले आकर स्कूल वाले रास्ते में उसके आने का इंतजार किया करता था वो अक्सर मेरे सामने से मुझे इग्नोर करके स्कूल पहुँच जाया करती थी | मैं पैदल चलकर स्कूल आता था जिस कारण से मुझे स्कूल पहुँचने में कभी – कभी देर हो जाती थी और मुझे सजा के तौर पे क्लास के बाहर खड़ा रहना पड़ता था मैं फिर भी क्लास के बाहर से उसे देखा करता था |   

लंच का टाइम और रिया की प्यारी सी मुस्कान

एक दिन लंच में हम सभी अपना लंच करके खेलने चले गये स्कूल में हमारे प्ले ग्राउंड में एक भेल वाले भैया आते थे हम 3-4 दोस्त हमेशा उनके पास भेल खाते थे हम लोग को तीखा भेल बहुत पसंद था तो उस दिन भेल वाले भैया ने हमारे भेल में कच्चा मिर्चा डाल दिया था हम लोग खा ही रहे थे कि इतने में रिया और उसकी फ्रेंड भी वहाँ भेल खाने आ गयी मैं रिया को देख ही रहा था कि मैंने भेल के साथ मिर्च को भी चबा लिया और मेरे आँखों से आंसू निकलने लगे सामने से रिया ने मेरी तरफ देखा और अपनी सहेली को मेरी तरफ इशारा करके धीमें  आवाज में कुछ बताने लगी मैं बस अपने आँखों में आंसू लेके उसको ही देखता रहा फिर उनका भेल बनते ही वो लोग अपना भेल लेकर वहाँ से चले गये | लंच ख़त्म होते ही मैं अपनी क्लास कि तरफ जा ही रहा था कि साइड से आवाज आयी भैया... मैंने मुड़कर देखा तो वो रिया की फ्रेंड थी साथ में रिया भी थी उसकी फ्रेंड और रिया एक ही प्लेट में भेल खा रहे थे रिया की फ्रेंड ने मेरे से कहा भैया और भेल खाओगे क्या? इतने में रिया के चेहरे में एक प्यारी सी मुस्कान आ गयी क्या बताऊ यारो कितनी प्यारी स्माइल थी मन तो कर रहा था कि उनके साथ में मैं भी खाऊं पर, नहीं तुम लोग खाओ ऐसा कहकर मैं वहाँ से चला गया |  

काश ये छुट्टियाँ ख़त्म हो जाये

कुछ दिनों बाद हमारा वार्षिक परीक्षा था तो मैं थोड़ा पढ़ाई पर ध्यान देने लग गया नहीं तो रिया अगले क्लास में चली जाती और मैं इसी क्लास में पड़े रहता | हमारी परिक्षाएं ख़त्म होने के बाद हमारी गर्मी कि छुट्टियाँ शुरू हो गयी और मैं घर में रहने लगा इस बीच मुझे रिया की बहुत याद आने लगी उसका वो शांत स्वभाव उसकी प्यारी सी स्माइल और भी बहुत कुछ मैं मन ही मन बस यही सोचने लगा कि काश ये गर्मी की छुट्टियाँ जल्दी ख़त्म हो जाये और स्कूल वापस से शुरू हो सके ताकि मैं रिया को वापस से देख सकूँ |

12वीं क्लास का पहला दिन और प्यार का THE END

गर्मी की छुट्टियाँ ख़त्म हो चुकी थी और क्लास का पहला दिन था मैं काफी उत्साहित था कि आज 2 महीने बाद रिया को देख पाउँगा | वैसे तो मैं रोज 8 बजे उठता था लेकिन उस दिन मैं सुबह जल्दी उठकर जल्दी – जल्दी तैयार होने लगा मेरे घर वालों को तो यकींन ही नहीं हो रहा था कि आज मैं इतनी जल्दी कैसे उठ गया हूँ मेरी माँ मेरे से पूछने लगी कि मेरा तबियत तो ठीक है ना मैने कहा – हाँ, सब ठीक है और जल्दी से तैयार होकर हमेशा कि तरह स्कूल वाले रास्ते में जाकर रिया का इंतजार करने लगा 10 बजकर 25 मिनट हो गये लेकिन रिया अभी तक नहीं आयी थी मुझे लगा शायद रिया आज जल्दी स्कूल पहुँच गयी होगी तो मैं जल्दी से स्कूल की तरफ भागा स्कूल पहुंचते ही मैं जल्दी से क्लास में गया लेकिन रिया वहाँ भी नहीं थी | मुझे लगा रिया आज स्कूल ही नहीं आयी होगी मैं अगले दिन फिर से रास्ते में रिया का इंतजार करने लगा लेकिन रिया नहीं आयी फिर मैं स्कूल चला गया रिया आज भी नहीं आई थी | अगले दिन फिर से मैं रिया का इंतजार करने लगा एक दिन, दो दिन, तीन दिन, रिया नहीं आयी तो एक दिन लंच में मैंने उसकी सहेली से पूछा कि क्या बात है? रिया स्कूल क्यूँ नहीं आ रही है? तो उसकी सहेली ने बताया कि रिया के पापा का यहाँ से कहीं और ट्रान्सफर हो गया है तो रिया ने अपना टी.सी. कटवा लिया है और अब रिया यहाँ नहीं आएगी इतना सुनते ही मेरी आँखों से आंसू बहने लगे मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा कोई अपना मुझे छोड़कर मुझसे बहुत दूर चला गया है फिर उस दिन मैं वापस अपने घर आकर बहुत रोया और सब कुछ भूलकर अपनी पढ़ाई पे फोकस करने लगा |

3.

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